मेरी पुस्तक का उद्देश्य - पोषण साक्षरता


जैसे एक अंधेरे कमरे में अगर हम कहते रहें कि यह बहुत अंधेरा है, यह बहुत अंधेरा है, तो क्या अंधेरा गायब हो जाएगा?

प्रकाश चालू करने पर अंधेरा गायब हो जाता है।

इसी तरह ओह मोटापा है , मोटापा है , मोटापा महामारी है  यह तभी गायब होगी जब लोगों को सही पोषण ज्ञान प्रदान किया जाएगा और इसे स्कूलों और कॉलेजों में अनिवार्य किया जाना चाहिए। पोषण शोध जो किसी बड़े ब्रांड द्वारा स्पान्सर नहीं हो, उन्हें पढ़ाया जाना चाहिए वरना रिसर्च अक्सर पैसों के   लाभ के लिए स्पॉसर के पक्ष में होते हैं। अन्यथा हम केवल ऐक्टर्स और क्रिकेटर्स द्वारा केवल प्रोडक्ट बिक्री    को बढ़ावा देने और लोगों को स्वास्थ्य की एक ऐसी छवि बेचने से प्रभावित होते जा रहे हैं जो नक़ली है।

कई बार जब मैं लिखता हूँ तो मैं खुद से सवाल करता हूँ, मेरे काम को कौन पढ़ेगा जिसमें मेरे 29 साल के सीखने और अनुभवों का समावेश है क्योंकि पहले से ही बहुत सारी किताबें हैं। मुझे एक कहावत याद है कि यह दुनिया बहुत बुरी है, बुरे लोगों की वजह से नहीं बल्कि अच्छे लोगों की चुप्पी की वजह से - नेपोलियन।

एक और कहावत है - जंगल में मोर नाच किसने देखा? अगर यह काम लोगों तक नहीं पहुंचेगा तो इससे किसी को फायदा नहीं होगा, मैं इसे लोगों तक पहुंचाऊंगा, खाना और व्यायाम सिर्फ वजन घटाने की चीज नहीं है, न ही यह सिर्फ़ कैलोरी इन कैलोरी आउट है, यह एक संपूर्ण विज्ञान है जो लोगों की उम्र और उसकी गुणवत्ता में सुधार कर सकता है, सेहत सबके लिए ज़रूरी है भले ही गरीब हो या अमीर, यह पुस्तक सभी के काम आएगी ।


परितोष जैन